चीन ने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के नेता पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध को एक बार फिर बाधित करने का संकेत देते हुए मंगलवार (20 जून) को कहा कि इस विशेष मामले में आतंकवाद के मुद्दे के संबंध में संयुक्त राष्ट्र समिति में असहमति बरकरार है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग की टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र की 1267 समिति की अगले माह होने जा रही समीक्षा से पहले अजहर के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में आर्इं।
गेंग ने संवाददाताओं को बताया, ''अपने रूख के बारे में हम कई बार बात कर चुके हैं। हमारा मानना है कि लक्ष्य एवं पेशेवर तथा न्याय संबंधी सिद्धांतों को बरकरार रखा जाए।''
संवाददाताओं ने गेंग से पूछा था कि अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाने के भारत के कदम पर चीन द्वारा बार-बार लगाई जाने वाली तकनीकी रोक को लेकर क्या कोई अग्रगामी कदम है। उन्होंने कहा, ''वर्तमान में, इस सूचीबद्ध मामले को लेकर कुछ सदस्यों में असहमति बरकरार है। चीन इस मुद्दे पर सामयिक पक्षों के साथ सहयोग और संवाद के लिए तैयार है।''
बीजिंग ने पठानकोट आतंकी हमले में अजहर की भूमिका के लिए उसे आतंकवादी घोषित करने के अमेरिका एवं अन्य देशों के संयुक्त राष्ट्र में प्रयासों पर तकनीकी रोक लगा रखी है। पिछले साल चीन ने अजहर को आतंकवादी का दर्जा देने के भारत के आवेदन पर तकनीकी रोक लगा दी थी।
फरवरी में चीनी अधिकारियों के साथ रणनीतिक वार्ता कर चुके विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा, ''अजहर के मामले में, जैश खुद 1267 के तहत निषिद्ध है। इसलिए सबूत तो 1267 समिति की कार्रवाई में है। इस मामले में जो कुछ भी उसने किया है, उसकी गतिविधियों का विस्तृत ब्यौरा है।''
उन्होंने कहा, ''ऐसा नहीं है कि समझाने के लिए सबूत का जिम्मा भारत का ही है। प्रायोजक (अमेरिका और अन्य देश) भी इस बात से सहमत प्रतीत होते हैं अन्यथा वे प्रस्ताव पेश करने की पहल नहीं करते।''
जयशंकर का इशारा अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा अजहर के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिए जाने के संबंध में था। यूएन की 1267 समिति में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं। अजहर के मुद्दे पर गेंग की प्रतिक्रिया के पहले ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक हुई थी जिसमें आतंकवाद से निपटने और इसकी रोकथाम के लिए एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने पर कड़ा रूख अपनाया गया था।
बैठक में हिस्सा लेने वाले विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने कहा था कि अच्छे और बुरे आतंकवादी पर अस्पष्टता खत्म करते हुए ब्रिक्स को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर एक व्यापक घोषणापत्र का समर्थन करना चाहिए। वी के सिंह ने कल ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''ब्रिक्स देशों में इस बात पर आम सहमति है कि हर तरह के आतंकवाद की निंदा की जानी चाहिए और सहयोग के लिए विभिन्न कदम उठाने चाहिए ताकि आतंकवाद का प्रसार न हो और हम में से किसी भी देश को कोई नुकसान न हो।''
गेंग ने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास आतंकवाद से निपटने के लिए एक कार्यकारी समूह है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र घोषणापत्र की जरूरत पर चीन का साझा रूख है। उन्होंने कहा, ''जहां तक आतंकवाद से निपटने पर सम्मेलन का सवाल है तो मेरा मानना है कि चीन और ब्रिक्स के अन्य देशों का रूख मिलता-जुलता है। हमें उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा आतंकवाद पर एक समग्र घोषणापत्र पारित कर सकती है।''
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